बिहार भूमि सर्वे पर नया अपडेट: पारिवारिक बंटवारे से जुड़ी अहम जानकारी


बिहार में चल रही भूमि सर्वे की प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में कई सवाल और भ्रम उत्पन्न हो रहे हैं। विशेष रूप से, पारिवारिक बंटवारे को लेकर कई भूमि मालिक यह समझ रहे हैं कि सर्वे के दौरान सरकार अपने आप उनकी ज़मीन का बंटवारा कर देगी। लेकिन हाल ही में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट की हैं, जिन्हें जानना ज़रूरी है।

सर्वे से नहीं होगा पारिवारिक बंटवारा

राजस्व विभाग ने यह साफ किया है कि भूमि सर्वे के माध्यम से किसी भी परिवार का पारिवारिक बंटवारा तय नहीं होगा। इसका सीधा मतलब है कि अगर किसी परिवार में तीन भाई हैं और उनके पास पाँच कट्ठा ज़मीन है, तो सर्वे के दौरान यह तय नहीं किया जाएगा कि कौन सा भाई कौन सी ज़मीन का मालिक होगा। यह जिम्मेदारी परिवार के सदस्यों की होगी कि वे आपसी सहमति से यह निर्णय लें कि किसे कौन सा प्लॉट मिलेगा।

आपसी सहमति से बनाएं बंटवारा नामा

पारिवारिक बंटवारा तभी संभव होगा जब सभी सदस्य मिलकर एक बंटवारा नामा (अलगाव समझौता) बनाएंगे। यदि परिवार के सदस्य पहले से ही यह तय कर लेते हैं कि किसे कौन सी ज़मीन मिलेगी, तो वे सर्वे टीम को यह बंटवारा नामा दिखा सकते हैं। इससे सर्वे की प्रक्रिया में आसानी होगी। इसलिए, जो लोग अभी तक यह प्रक्रिया नहीं अपना रहे हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द इस दिशा में कदम उठाएं।

खतियान का उद्देश्य

भूमि सर्वे के दौरान सरकार द्वारा खतियान तैयार किया जाएगा, जिसमें जमीन के मालिकों के नाम और उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार ज़मीन का विवरण दर्ज होगा। परंतु यह खतियान सिर्फ ज़मीन की मालिकाना हक को दिखाएगा, यह तय नहीं करेगा कि किस भाई को कौन सी ज़मीन मिलेगी। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारिवारिक सदस्यों के आपसी समझौते पर निर्भर होगी।

सर्वे के बाद की प्रक्रिया

सर्वे के बाद सभी जमीन मालिकों को एक प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें उनकी ज़मीन की पूरी जानकारी दर्ज होगी। यह कार्ड भविष्य में सरकारी लाभ लेने और जमीन से जुड़े अन्य कार्यों के लिए काम आएगा। यदि किसी को अपनी ज़मीन से जुड़े दस्तावेज़ निकालने में कोई समस्या हो रही है, तो वह वसुधा केंद्र या सीएससी सेंटर जाकर मदद ले सकता है।

जीवित रैयत को वंशावली देने की आवश्यकता नहीं

यदि ज़मीन के मालिक अभी जीवित हैं, तो उन्हें वंशावली देने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसे मामलों में सर्वे के दौरान उनके नाम से ही खतियान बनाया जाएगा। लेकिन जिनके परिवार के सदस्य जीवित नहीं हैं, उनके लिए वंशावली तैयार करना आवश्यक होगा।

निष्कर्ष

बिहार में भूमि सर्वे की प्रक्रिया जारी है और इसे लेकर पारिवारिक बंटवारे से संबंधित कई भ्रांतियां दूर की जा रही हैं। पारिवारिक बंटवारे का निर्णय सर्वे के दौरान नहीं होगा, बल्कि यह परिवार के सदस्यों को आपसी समझौते से करना होगा। इस प्रक्रिया को समझकर और सही जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना सभी के लिए फायदेमंद होगा।

अगर आपको इस बारे में और जानकारी चाहिए या बंटवारा नामा कैसे बनाएं, तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। भविष्य में इस विषय पर अधिक जानकारी लाने का हमारा प्रयास रहेगा।

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