गैरमजरूआ जमीन का सर्वे कैसे होगा? पूरी जानकारी


भूमि सर्वेक्षण के संदर्भ में गैरमजरूआ जमीन एक अहम मुद्दा है, खासकर बिहार राज्य में। वर्तमान में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान गैरमजरूआ जमीन के बारे में कई लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस ब्लॉग में हम गैरमजरूआ जमीन से संबंधित 9 मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करेंगे जो सर्वेक्षण के दौरान आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

गैरमजरूआ जमीन क्या है?

गैरमजरूआ शब्द दो हिस्सों से बना है - "गैर" जिसका मतलब है "नहीं" और "मजरूआ" जिसका मतलब है "खेती योग्य भूमि"। यानी, गैरमजरूआ जमीन ऐसी भूमि होती है जो खेती के योग्य नहीं होती। गैरमजरूआ जमीन के दो प्रकार होते हैं:

  1. गैरमजरूआ खास: यह जमीन किसी खास व्यक्ति या समूह के नाम पर होती है। यह भूमि खेती के योग्य नहीं होती, फिर भी किसी व्यक्ति के नाम पर बंदोबस्त होती है। यह चारागाह, खलिहान, या किसी अन्य उपयोग की हो सकती है।
  2. गैरमजरूआ आम: यह भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए होती है, जैसे खेल का मैदान, मंदिर, मस्जिद, श्मशान घाट आदि। इस पर सभी का अधिकार होता है।

गैरमजरूआ जमीन का सर्वे और नौ महत्वपूर्ण बिंदु

अब हम उन 9 बिंदुओं पर चर्चा करेंगे जो सर्वेक्षण में काम आएंगे।

1. पर्चाधारी और जमीन का खाता

अगर किसी गैरमजरूआ खास जमीन पर अंचल अधिकारी (सीओ) द्वारा पर्चा प्रदान किया गया है, तो इस स्थिति में भूमि का खाता बिहार सरकार के नाम से खुलेगा। पर्चा धारी का नाम केवल कैफियत कॉलम में दखलकार के रूप में दर्ज किया जाएगा। क्योंकि अंचल अधिकारी को गैरमजरूआ खास या आम भूमि का बंदोबस्त करने का अधिकार नहीं होता।

2. बिना आधार की जमाबंदी

अगर गैरमजरूआ भूमि की जमाबंदी बिना किसी वैध आधार (दस्तावेज़) के चल रही है, तो सर्वेक्षण के दौरान जमीन का खाता बिहार सरकार के नाम से ही खुलेगा। कैफियत कॉलम में दखलकार का नाम दर्ज होगा।

3. सरकार द्वारा बंदोबस्त की गई भूमि

यदि गैरमजरूआ खास भूमि सरकार द्वारा किसी रयत को बंदोबस्त की गई थी और वर्तमान में किसी अन्य व्यक्ति ने उस पर कब्जा कर लिया है, तो खाता मूल पर्चा धारी के नाम से ही खुलेगा। अवैध कब्जा करने वाले का नाम कैफियत कॉलम में दर्ज किया जाएगा।

4. कैडेस्ट्रल खतियान में रैयती भूमि

यदि कैडेस्ट्रल खतियान में गैरमजरूआ भूमि को चक खतियान में रैयती बना दिया गया है, तो ऐसी स्थिति में अंचल अधिकारी को पक्षकार बनाकर सुनवाई की जाएगी और तभी निर्णय लिया जाएगा कि खाता किसके नाम से खुलेगा।

5. अवैध विखंडन

अगर गैरमजरूआ भूमि का अवैध रूप से विखंडन कर कई व्यक्तियों ने अलग-अलग हिस्सों में कब्जा कर रखा है, तो सर्वेक्षण में इसे एक ही प्लॉट के रूप में दिखाया जाएगा और खाता बिहार सरकार के नाम से खुलेगा। सभी दखलकारों के नाम कैफियत कॉलम में दर्ज होंगे।

6. जमींदारी प्रथा द्वारा बंदोबस्ती

यदि जमींदार द्वारा गैरमजरूआ आम भूमि का बंदोबस्त किया गया है और न्यायालय द्वारा इसे वैध पाया गया है, तब खाता पर्चा धारी के नाम से खुलेगा। अगर जमाबंदी नहीं है, तो खाता बिहार सरकार के नाम से खुलेगा।

7. मकान बनाकर रहना

यदि गैरमजरूआ खास या आम भूमि पर कोई रयत का वंशज मकान बनाकर रह रहा है और उसके पास लगान रसीद के अलावा कोई दस्तावेज नहीं है, तो अंचल अधिकारी के प्रमाण पत्र के आधार पर ही खाता खोला जाएगा। अगर प्रमाण पत्र अवैध है, तो खाता बिहार सरकार के नाम से ही खुलेगा।

8. केवाला (दस्तावेज) दिखाना

अगर कोई व्यक्ति गैरमजरूआ खास भूमि का कोई केवाला दिखाकर खाता खोलने का दावा करता है, लेकिन जमाबंदी दर्ज नहीं है, तो खाता बिहार सरकार के नाम से ही खुलेगा।

9. न्यायालय द्वारा बंटवारा

अगर कोर्ट ने गैरमजरूआ भूमि का बंटवारा कर दिया है लेकिन सरकार को पक्षकार नहीं बनाया गया है, तो ऐसी स्थिति में खाता बिहार सरकार के नाम से ही खुलेगा।

निष्कर्ष

गैरमजरूआ जमीन का सर्वे जटिल प्रक्रिया है और इसके कई नियम होते हैं। यह तय है कि गैरमजरूआ आम भूमि का खाता किसी भी व्यक्ति के नाम से नहीं खोला जाएगा। गैरमजरूआ खास भूमि का खाता तभी खुलेगा जब उसके कब्जे की वैधता साबित हो और जमाबंदी वर्षों से कायम हो।

अगर आपके पास गैरमजरूआ जमीन से संबंधित कोई प्रश्न या भ्रम है, तो ऊपर बताए गए बिंदुओं के आधार पर स्थिति का आकलन करें और उचित कदम उठाएं।

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